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अब होगी, तब होगी रजिस्ट्री, सुन-सुन कान पक गए


Now it will happen, then the registry will be done, ears are cooked after listening

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सरकार व प्रशासन से हर सप्ताह रजिस्ट्री होने की बात सुन-सुनकर लोगों के कान पक गए हैं। लैटर आफ इंटेंट की कोई जरूरत नहीं है रजिस्ट्री अपने आप में ही लेटर आफ इंटेंट की पूर्ति कर देता है। एम्स संघर्ष समिति के लोग सरकार पर सवाल उठा रहे हैं। यह बात एम्स संघर्ष समिति की ओर से मनेठी उपतहसील परिसर में समिति अध्यक्ष श्योताज सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में कही गई।
उन्होंने एम्स निर्माण के लिए दी गई जमीन की तुरंत रजिस्ट्री कराने तथा किसानों को मुआवजा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि आगामी 26 जून को उपतहसील मनेठी में एक महापंचायत बुलाई जाएगी।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि एम्स संघर्ष समिति अपने गठन काल से ही एक गैर राजनीति मंच रहा है। यह एम्स निर्माण के लिए संघर्ष का औजार है, जिसका सत्तापक्ष और विपक्ष से कोई लेना देना नहीं है। एम्स निर्माण के मुद्दे पर जिसने भी समर्थन दिया, समिति ने उनका स्वागत किया है लेकिन आंदोलन की लगाम समिति के ही हाथों में रही है। आज आमजन के संघर्ष के औजार को विपक्ष का तमगा लगाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि लैटर आफ इंटेंट की कोई जरूरत नहीं है रजिस्ट्री अपने आप में ही लेटर आफ इंटेंट की पूर्ति कर देता है। लेटर आफ इंटेंट दो पार्टियों के बीच एक कार्य के लिए समझौता होता है, इससे ज्यादा कोई मायने नहीं रखता है। सरकार लेटर आफ इंटेंट के नाम पर कई महीनों निकालना चाहती है तथा एक के बाद एक पेंच बेवजह फंसाए जा रहे हैं। जोकि गलत है। अगर लेटर आफ इंटेंट की जरूरत है तो सरकार रजिस्ट्री और लेटर आफ इंटेंट दोनों कार्य एक साथ करवाया जा सकता है ताकि भू मालिकों को बार-बार चक्कर न लगाना पड़े। जब किसानों ने सरकार के साथ 40 लाख रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से इकरारनाम सरकार के साथ कर लिया है तो लेटर आफ इंटेंट की कोई जरूरत नहीं है। इस मौके ओमप्रकाश सैन, मास्टर भारत सिंह, बीडी यादव, दयाराम, सतप्रकाश गोयल, दिलबाग सिंह, रामस्वरूप, मास्टर लक्ष्मण सिंह, सुरेश कुमार, कमल सिंह, कर्नल राजेंद्र यादव आदि वक्ताओं ने अपने विचार रखे। वहीं बैठक में राजरानी, पवन किराड़, दयाराम, तुलाराम, राज सिंह, शक्ति सिंह, महिपाल, महाबीर, अमर सिंह, अतर सिंह और कृष्ण कुमार आदि मौजूद रहे।

सरकार व प्रशासन से हर सप्ताह रजिस्ट्री होने की बात सुन-सुनकर लोगों के कान पक गए हैं। लैटर आफ इंटेंट की कोई जरूरत नहीं है रजिस्ट्री अपने आप में ही लेटर आफ इंटेंट की पूर्ति कर देता है। एम्स संघर्ष समिति के लोग सरकार पर सवाल उठा रहे हैं। यह बात एम्स संघर्ष समिति की ओर से मनेठी उपतहसील परिसर में समिति अध्यक्ष श्योताज सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में कही गई।

उन्होंने एम्स निर्माण के लिए दी गई जमीन की तुरंत रजिस्ट्री कराने तथा किसानों को मुआवजा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि आगामी 26 जून को उपतहसील मनेठी में एक महापंचायत बुलाई जाएगी।

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि एम्स संघर्ष समिति अपने गठन काल से ही एक गैर राजनीति मंच रहा है। यह एम्स निर्माण के लिए संघर्ष का औजार है, जिसका सत्तापक्ष और विपक्ष से कोई लेना देना नहीं है। एम्स निर्माण के मुद्दे पर जिसने भी समर्थन दिया, समिति ने उनका स्वागत किया है लेकिन आंदोलन की लगाम समिति के ही हाथों में रही है। आज आमजन के संघर्ष के औजार को विपक्ष का तमगा लगाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि लैटर आफ इंटेंट की कोई जरूरत नहीं है रजिस्ट्री अपने आप में ही लेटर आफ इंटेंट की पूर्ति कर देता है। लेटर आफ इंटेंट दो पार्टियों के बीच एक कार्य के लिए समझौता होता है, इससे ज्यादा कोई मायने नहीं रखता है। सरकार लेटर आफ इंटेंट के नाम पर कई महीनों निकालना चाहती है तथा एक के बाद एक पेंच बेवजह फंसाए जा रहे हैं। जोकि गलत है। अगर लेटर आफ इंटेंट की जरूरत है तो सरकार रजिस्ट्री और लेटर आफ इंटेंट दोनों कार्य एक साथ करवाया जा सकता है ताकि भू मालिकों को बार-बार चक्कर न लगाना पड़े। जब किसानों ने सरकार के साथ 40 लाख रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से इकरारनाम सरकार के साथ कर लिया है तो लेटर आफ इंटेंट की कोई जरूरत नहीं है। इस मौके ओमप्रकाश सैन, मास्टर भारत सिंह, बीडी यादव, दयाराम, सतप्रकाश गोयल, दिलबाग सिंह, रामस्वरूप, मास्टर लक्ष्मण सिंह, सुरेश कुमार, कमल सिंह, कर्नल राजेंद्र यादव आदि वक्ताओं ने अपने विचार रखे। वहीं बैठक में राजरानी, पवन किराड़, दयाराम, तुलाराम, राज सिंह, शक्ति सिंह, महिपाल, महाबीर, अमर सिंह, अतर सिंह और कृष्ण कुमार आदि मौजूद रहे।

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