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अध्यापकों को दिया गया तनाव मुक्त रहने का प्रशिक्षण


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महेंद्रगढ़। आरपीएस सीनियर सेकेंडरी स्कूल में वीरवार को तनाव प्रबंधन विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया। इसमें 300 से अधिक अध्यापक-अध्यापिकाओं को तनाव मुक्त रहने का प्रशिक्षण दिया गया।
इस दौरान आरपीएस ग्रुप की चेयरपर्सन डॉ. पवित्रा राव ने भावी पीढ़ी के भविष्य निर्माताओं को तनाव से दूर रह कर शिक्षण कार्य को ओर बेहतर बनाने के लिए प्रेरित किया। कहा कि तनाव जीवन की खुशियों में ग्रहण के समान है। इससे जितना दूर रहा जाए उतना ही खुशहाल जीवन के लिए अच्छा होता है। मुख्य वक्ता मृदुल जैन ने बताया कि हम अपनी भावनाओं को प्रबंधित करके न केवल शिक्षण कार्य बल्कि आम जीवन में भी तनाव को कम कर सकते हैं। पहले हमें तनाव के स्तर को पहचानना चाहिए फिर उसके प्रबंधन के प्रयास करने चाहिए। प्रयास करें कि रिश्तों को महत्व दें, बातों को नहीं। अपनी सोच को बदलें, व्यवहार में बदलाव लाएं, जीवन शैली में बदलाव लाएं, ये सब बातें तनाव प्रबंधन में मदद करेंगी। अपने काम के तनाव को कम करने के लिए हमेशा योजना बनाकर चलें, हमें पता होना चाहिए कि हमारे जीवन में किस बात व किस काम को प्राथमिकता देनी है। सकारात्मक सोच रखें नकारात्मक सोच मन में न लाएं। आत्मबल को पहचानकर अपने लिए नए अवसर तलाशे और जीवन में नए बदलाव के साथ खुशी और हर्षोल्लास के साथ अपना जीवन बिताएं। विद्यालय के प्राचार्य सुभाष यादव ने मुख्य वक्ता मृदुल जैन का आभार जताते हुए शिक्षकों को तनाव से दूर रहने के लिए बताए गए उपायों पर अमल करने के लिए प्रेरित किया।

महेंद्रगढ़। आरपीएस सीनियर सेकेंडरी स्कूल में वीरवार को तनाव प्रबंधन विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया। इसमें 300 से अधिक अध्यापक-अध्यापिकाओं को तनाव मुक्त रहने का प्रशिक्षण दिया गया।

इस दौरान आरपीएस ग्रुप की चेयरपर्सन डॉ. पवित्रा राव ने भावी पीढ़ी के भविष्य निर्माताओं को तनाव से दूर रह कर शिक्षण कार्य को ओर बेहतर बनाने के लिए प्रेरित किया। कहा कि तनाव जीवन की खुशियों में ग्रहण के समान है। इससे जितना दूर रहा जाए उतना ही खुशहाल जीवन के लिए अच्छा होता है। मुख्य वक्ता मृदुल जैन ने बताया कि हम अपनी भावनाओं को प्रबंधित करके न केवल शिक्षण कार्य बल्कि आम जीवन में भी तनाव को कम कर सकते हैं। पहले हमें तनाव के स्तर को पहचानना चाहिए फिर उसके प्रबंधन के प्रयास करने चाहिए। प्रयास करें कि रिश्तों को महत्व दें, बातों को नहीं। अपनी सोच को बदलें, व्यवहार में बदलाव लाएं, जीवन शैली में बदलाव लाएं, ये सब बातें तनाव प्रबंधन में मदद करेंगी। अपने काम के तनाव को कम करने के लिए हमेशा योजना बनाकर चलें, हमें पता होना चाहिए कि हमारे जीवन में किस बात व किस काम को प्राथमिकता देनी है। सकारात्मक सोच रखें नकारात्मक सोच मन में न लाएं। आत्मबल को पहचानकर अपने लिए नए अवसर तलाशे और जीवन में नए बदलाव के साथ खुशी और हर्षोल्लास के साथ अपना जीवन बिताएं। विद्यालय के प्राचार्य सुभाष यादव ने मुख्य वक्ता मृदुल जैन का आभार जताते हुए शिक्षकों को तनाव से दूर रहने के लिए बताए गए उपायों पर अमल करने के लिए प्रेरित किया।

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