अग्निपथ योजना के विरोध में सड़क पर उतरा संयुक्त किसान मोर्चा, राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन


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अग्निपथ योजना के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा की तरफ से शुक्रवार को लघु सचिवालय के सामने प्रदर्शन किया गया। किसान मोर्चा ने इसे अग्निपथ विरोध दिवस के रूप में मनाया। इसके तहत प्रदर्शन करते हुए किसान लघु सचिवालय पहुंचे, जहां उन्होंने सीटीएम अशोक कुमार को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। किसानों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अग्निपथ योजना को वापस लेने की मांग उठाई।
भाकियू जिलाध्यक्ष सुभाष गुर्जर, विजयपाल, एडवोकेट साहब सिंह गुर्जर, जरनैल ने ज्ञापन में कहा कि सरकार ने सेना में जवानों की पक्की नौकरी बंद कर दी है। अब से सेना में भर्ती सिर्फ चार साल के कॉन्ट्रैक्ट के जरिये मिलेगी। इससे कर्मचारियों को न तो कोई रैंक दिया जाएगा न ही चार साल के बाद कोई ग्रेच्युटी या पेंशन। चार साल की सेवा समाप्त होने के बाद इनमें से एक चौथाई या उससे भी कम को ही सेना में पक्की नौकरी दी जाएगी। इतने बड़े और दूरगामी बदलावों की घोषणा करने से पहले सरकार ने न्यूनतम प्रक्रिया का भी पालन नहीं किया। संसद के दोनों सदनों या संसद की रक्षा मामलों की स्थायी समिति के सामने इन प्रस्तावों पर भी कोई चर्चा नहीं हुई। उन्होंने कहा कि अगर यह योजना अपने वर्तमान स्वरूप में लागू होती है तो आने वाले 15 वर्षों में हमारे सैन्य बलों की संख्या आधी या उससे भी कम रह जाएगी। यह अफसोस की बात है कि सरकार यह बदलाव उस समय ला रही है, जब पड़ोसी देशों की ओर से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा बना हुआ है।
भर्ती प्रक्रिया को बीच में रोकना
युवाओं के सपनों से खिलवाड़
जिन युवकों की भर्ती प्रक्रिया 2020-21 में शुरू हो चुकी थी उसे बीच में रोकना उनके सपनों के साथ खिलवाड़ है। थल सेना तथा वायु सेना में जो पक्की भर्ती की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी, उसमें फाइनल टेस्ट या नियुक्ति पत्र जारी करने से पहले ही रद कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि अग्निपथ योजना की घोषणा के बाद से युवाओं का आक्रोश सड़कों पर उबल पड़ा है। यही कारण है कि पूरे देश भर में सड़कों पर प्रदर्शन हो रहे हैं। इस योजना के तहत भर्ती का नोटिफिकेशन वापस लिया जाए। साथ ही अग्निपथ विरोधी प्रदर्शनों में शामिल युवाओं के खिलाफ दर्ज सभी मुकदमे वापस लिए जाएं और गिरफ्तार युवाओं को रिहा किया जाए।

अग्निपथ योजना के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा की तरफ से शुक्रवार को लघु सचिवालय के सामने प्रदर्शन किया गया। किसान मोर्चा ने इसे अग्निपथ विरोध दिवस के रूप में मनाया। इसके तहत प्रदर्शन करते हुए किसान लघु सचिवालय पहुंचे, जहां उन्होंने सीटीएम अशोक कुमार को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। किसानों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अग्निपथ योजना को वापस लेने की मांग उठाई।

भाकियू जिलाध्यक्ष सुभाष गुर्जर, विजयपाल, एडवोकेट साहब सिंह गुर्जर, जरनैल ने ज्ञापन में कहा कि सरकार ने सेना में जवानों की पक्की नौकरी बंद कर दी है। अब से सेना में भर्ती सिर्फ चार साल के कॉन्ट्रैक्ट के जरिये मिलेगी। इससे कर्मचारियों को न तो कोई रैंक दिया जाएगा न ही चार साल के बाद कोई ग्रेच्युटी या पेंशन। चार साल की सेवा समाप्त होने के बाद इनमें से एक चौथाई या उससे भी कम को ही सेना में पक्की नौकरी दी जाएगी। इतने बड़े और दूरगामी बदलावों की घोषणा करने से पहले सरकार ने न्यूनतम प्रक्रिया का भी पालन नहीं किया। संसद के दोनों सदनों या संसद की रक्षा मामलों की स्थायी समिति के सामने इन प्रस्तावों पर भी कोई चर्चा नहीं हुई। उन्होंने कहा कि अगर यह योजना अपने वर्तमान स्वरूप में लागू होती है तो आने वाले 15 वर्षों में हमारे सैन्य बलों की संख्या आधी या उससे भी कम रह जाएगी। यह अफसोस की बात है कि सरकार यह बदलाव उस समय ला रही है, जब पड़ोसी देशों की ओर से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा बना हुआ है।

भर्ती प्रक्रिया को बीच में रोकना

युवाओं के सपनों से खिलवाड़

जिन युवकों की भर्ती प्रक्रिया 2020-21 में शुरू हो चुकी थी उसे बीच में रोकना उनके सपनों के साथ खिलवाड़ है। थल सेना तथा वायु सेना में जो पक्की भर्ती की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी, उसमें फाइनल टेस्ट या नियुक्ति पत्र जारी करने से पहले ही रद कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि अग्निपथ योजना की घोषणा के बाद से युवाओं का आक्रोश सड़कों पर उबल पड़ा है। यही कारण है कि पूरे देश भर में सड़कों पर प्रदर्शन हो रहे हैं। इस योजना के तहत भर्ती का नोटिफिकेशन वापस लिया जाए। साथ ही अग्निपथ विरोधी प्रदर्शनों में शामिल युवाओं के खिलाफ दर्ज सभी मुकदमे वापस लिए जाएं और गिरफ्तार युवाओं को रिहा किया जाए।

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Written by Haryanacircle

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