अग्निपथ पर चलकर देश के युवा बनेंगे अग्निवीर


ख़बर सुनें

भारतीय सेना के तीनों अंगों में भर्ती के लिए केंद्र सरकार की ओर से शुरू की गई अग्निपथ योजना को लेकर युवाओं में उत्साह है। वे इस योजना के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं की जानकारी हासिल कर रहे हैं। कई जगह इस योजना का विरोध भी किया जा रहा है। वहीं कई विशेषज्ञ इस योजना को देशहित में बताकर युवाओं को इसके लाभ से अवगत करा रहे हैं। इसके अलावा भर्ती की तैयारी कर रहे युवा पूर्व सैनिकों से संपर्क कर इस बारे में और अधिक जानकारी ले रहे हैं।
भारतीय सेना के सेवानिवृत्त सूबेदार रविंद्र कौशिक का कहना है कि अग्निपथ योजना देश, सेना और युवाओं तीनों के लिए काफी लाभदायक है। उनके पास सेना में भर्ती के लिए तैयारी कर रहे युवाओं के लगातार कॉल आ रहे हैं। युवाओं में अभी इस योजना को लेकर कई प्रकार की भ्रांतियां है। उन्होंने बताया कि अग्निवीर को राज्यों और केंद्रीय मंत्रालयों की नौकरियों में प्राथमिकता दी जाएगी। उन्हें पूर्व सैनिक कोटे का भी लाभ मिलेगा। कौशिक ने बताया कि इस योजना के शुरू होने से सिविल जॉब के लिए अनुभवी युवा मिलेंगे वहीं भ्रष्टाचार भी खत्म होगा। कौशिक ने बताया कि फौज में सैनिकों की स्किल पर भी ध्यान दिया जाता है। इसलिए वहां भी कक्षाएं लगती हैं। जब फौजी युवा अवस्था में सेवानिवृत्त होगा तो वह अपना कोई बिजनेस शुरू कर सकता है और सेवानिवृत्त होने पर मिली धनराशि को उसमें निवेश कर सकता है। योजना के मुताबिक चार साल नौकरी के लिए सेना से सेवानिवृत्त युवा की उम्र करीब 25 ही होगी। इससे नुकसान ये है कि सेवानिवृत्त होने के बाद किसी कारणवश उसे दूसरी जगह नौकरी नहीं मिलती तो देश विरोधी ताकतें युवाओं को लालच देकर उसके सेना के अनुभव का गलत फायदा उठा सकती हैं।
सूरज ने कहा अभी अग्निपथ के बारे में अच्छी तरह से समझ नहीं पाए हैं। अभी जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक योजना में फायदा ये नजर आया है कि सैनिक युवा अवस्था में सेवानिवृत्त होकर कोई दूसरा काम शुरू कर सकता है। सेवानिवृत्त युवाओं को अन्य नौकरियों में भी इसका लाभ मिलेगा। नुकसान ये है कि कई युवा अपना जीवन देश की सेवा के लिए सेना को समर्पित करना चाहते हैं, लेकिन चार साल बाद उन्हें सेवानिवृत्त कर दिया जाएगा तो यहां पर उसके पास कोई रास्ता नहीं बचेगा।
एक साल से सेना में भर्ती की तैयारी कर रहे आर्यन का कहना है कि इस योजना के जहां कई लाभ हैं वहीं सबसे बड़ा नुकसान यह है कि युवाओं को चार साल नौकरी करने के बाद फिर से दूसरी नौकरी की तैयारी करनी पड़ेगी। वहीं उन्हें पहली नौकरी से न तो ग्रेच्युटी मिलेगी और न ही पेंशन का लाभ मिलेगा।

भारतीय सेना के तीनों अंगों में भर्ती के लिए केंद्र सरकार की ओर से शुरू की गई अग्निपथ योजना को लेकर युवाओं में उत्साह है। वे इस योजना के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं की जानकारी हासिल कर रहे हैं। कई जगह इस योजना का विरोध भी किया जा रहा है। वहीं कई विशेषज्ञ इस योजना को देशहित में बताकर युवाओं को इसके लाभ से अवगत करा रहे हैं। इसके अलावा भर्ती की तैयारी कर रहे युवा पूर्व सैनिकों से संपर्क कर इस बारे में और अधिक जानकारी ले रहे हैं।

भारतीय सेना के सेवानिवृत्त सूबेदार रविंद्र कौशिक का कहना है कि अग्निपथ योजना देश, सेना और युवाओं तीनों के लिए काफी लाभदायक है। उनके पास सेना में भर्ती के लिए तैयारी कर रहे युवाओं के लगातार कॉल आ रहे हैं। युवाओं में अभी इस योजना को लेकर कई प्रकार की भ्रांतियां है। उन्होंने बताया कि अग्निवीर को राज्यों और केंद्रीय मंत्रालयों की नौकरियों में प्राथमिकता दी जाएगी। उन्हें पूर्व सैनिक कोटे का भी लाभ मिलेगा। कौशिक ने बताया कि इस योजना के शुरू होने से सिविल जॉब के लिए अनुभवी युवा मिलेंगे वहीं भ्रष्टाचार भी खत्म होगा। कौशिक ने बताया कि फौज में सैनिकों की स्किल पर भी ध्यान दिया जाता है। इसलिए वहां भी कक्षाएं लगती हैं। जब फौजी युवा अवस्था में सेवानिवृत्त होगा तो वह अपना कोई बिजनेस शुरू कर सकता है और सेवानिवृत्त होने पर मिली धनराशि को उसमें निवेश कर सकता है। योजना के मुताबिक चार साल नौकरी के लिए सेना से सेवानिवृत्त युवा की उम्र करीब 25 ही होगी। इससे नुकसान ये है कि सेवानिवृत्त होने के बाद किसी कारणवश उसे दूसरी जगह नौकरी नहीं मिलती तो देश विरोधी ताकतें युवाओं को लालच देकर उसके सेना के अनुभव का गलत फायदा उठा सकती हैं।

सूरज ने कहा अभी अग्निपथ के बारे में अच्छी तरह से समझ नहीं पाए हैं। अभी जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक योजना में फायदा ये नजर आया है कि सैनिक युवा अवस्था में सेवानिवृत्त होकर कोई दूसरा काम शुरू कर सकता है। सेवानिवृत्त युवाओं को अन्य नौकरियों में भी इसका लाभ मिलेगा। नुकसान ये है कि कई युवा अपना जीवन देश की सेवा के लिए सेना को समर्पित करना चाहते हैं, लेकिन चार साल बाद उन्हें सेवानिवृत्त कर दिया जाएगा तो यहां पर उसके पास कोई रास्ता नहीं बचेगा।

एक साल से सेना में भर्ती की तैयारी कर रहे आर्यन का कहना है कि इस योजना के जहां कई लाभ हैं वहीं सबसे बड़ा नुकसान यह है कि युवाओं को चार साल नौकरी करने के बाद फिर से दूसरी नौकरी की तैयारी करनी पड़ेगी। वहीं उन्हें पहली नौकरी से न तो ग्रेच्युटी मिलेगी और न ही पेंशन का लाभ मिलेगा।

.


What do you think?

Written by Haryanacircle

अमर उजाला ने 12वीं कक्षा की हरियाणा टॉपर साक्षी के साथ साझा की उसकी खुशी

राज्य सरकार ने कलाकारों के पंजीकरण के लिए शुरू किया नया पोर्टल