अंसल प्रॉपर्टीज पर 100 करोड़ रुपये जुर्माना, पर्यावरण नियमों का उल्लंघन पर सीपीसीबी ने भेजा नोटिस


गुड़गांव : नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश पर सेंट्रल पलूशन कंट्रोल बोर्ड (सीपीसीबी) ने अंसल प्रॉपर्टीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड पर पर्यावरण नियमों के उल्लंघन के आरोप में 100 करोड़ रुपये का जुर्माना भरने का नोटिस दिया है। इस रियल एस्टेट कंपनी के चेयरमैन को नोटिस देकर स्पष्ट किया है कि यदि 15 दिन के अंदर यह राशि जमा नहीं करवाई जाती है तो ब्याज लगाया जाएगा। सीपीसीबी के चेयरमैन तन्मय कुमार ने 7 जून को इस कंपनी को नोटिस जारी किया है। इसके मुताबिक भूजल दोहन और रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम ठप मिलने पर सेंट्रल ग्राउंड वॉटर अथॉरिटी (सीजीडब्ल्यूए) को पर्यावरण नुकसान की एवज में निर्धारित राशि की भरपाई करनी होगी। पर्यावरण को दुरुस्त करने के लिए 30 दिन के अंदर एक्शन प्लान देना होगा। इस रिहायशी कॉलोनी को लेकर जरूरी एनओसी या कनसेंट के लिए संबंधित विभाग में आवेदन करना होगा। यदि किसी भी शर्त का उल्लंघन होता है तो एनवायरमेंट प्रोजेक्ट एक्ट 1986 के तहत कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

क्या है मामला
सुशांत लोक वन निवासियों ने 4 सितंबर, 2018 को एनजीटी में याचिका दायर की थी। इसमें कहा था कि सी ब्लॉक के पार्क में अतिक्रमण है। भूजल का अवैध रूप से दोहन किया जा रहा है। सीवर ट्रीटमेंट प्लांट नहीं है। सीवर का पानी बरसाती नालों में जा रहा है। आरोप था कि इस रियल एस्टेट कंपनी ने 45 प्रतिशत जमीन सडक़, ओपन स्पेस, स्कूल, कॉमन एरिया के लिए छोड़नी थी, जो नहीं है।

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5 विभागों की टीम ने किया था निरीक्षण
एनजीटी ने इस याचिका पर सीपीसीबी की अगुवाई में पांच विभागों की एक कमिटी का गठन किया था। जांच कमिटी ने निरीक्षण में ग्रीन एरिया और ग्रीन बेल्ट में अतिक्रमण पाई थी। साल 2006 के बाद दो लाइसेंस का इनवायरमेंट क्लियरेंस नहीं लिया था। वॉटर और एयर एक्ट का दोषी इस कंपनी को पाया था। 39 बोरवेल मौके पर मिले थे। रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम घरों में नहीं थे। कॉमन एरिया में लगे यह सिस्टम काम नहीं कर रहे थे। सीवर का पानी बरसाती नाले में जा रहा था। कचरा नहीं उठाया जा रहा था। सीएंडडी वेस्ट इधर-उधर पड़ा था। नियमों के खिलाफ जनरेटर लगाए थे।

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फरवरी, 2019 में लगाया था 12.18 करोड़ का जुर्माना
सीपीसीबी ने फरवरी, 2019 में इस रियल एस्टेट कंपनी पर 12.18 करोड़ का जुर्माना लगाया था। जून, 2019 में जुर्माना नहीं भरने इस राशि को बढ़ाकर 14.69 कर दिया। इस जुर्माना राशि की अब तक अदायगी नहीं हो सकी है।

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कैसे हुआ 100 करोड़ के जुर्माने का आकलन
28 सितंबर, 2021 को सुनवाई के दौरान एनजीटी ने आदेश जारी किए कि अंसल पर अब तक लगाया जुर्माना सिर्फ सीवर का गंदा पानी बरसाती नाले में डालने को लेकर लगाया है। इनवायरमेंट क्लीयरेंस नहीं लेने को लेकर जुर्माना नहीं लगाया है। हरियाणा स्टेट पलूशन कंट्रोल बोर्ड ने एनजीटी को अवगत करवाया कि इस रियल एस्टेट कंपनी के आईवीवाई ग्रुप हाउसिंग के नाम से 5.88 एकड़ को लेकर इनवायरमेंट क्लीयरेंस नहीं ली है। इस प्रोजेक्ट की कॉस्ट इस कंपनी ने सिर्फ करीब 151.49 करोड़ रुपये दिखाई है। एनजीटी ने सुप्रीम कोर्ट के गोयल गंगा डिवेलपर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड केस में जारी आदेश का हवाला देते हुए कहा कि या तो जुर्माना राशि पूरे प्रोजेक्ट का 10 प्रतिशत होना चाहिए या 100 करोड़ रुपये होना चाहिए। इस प्रोजेक्ट का 10 प्रतिशत राशि 100 करोड़ रुपये से कम बनती है। एनजीटी ने सीपीसीबी को आदेश दिए कि इनवायरमेंट क्लीयरेंस नहीं लेने पर इस कंपनी से 100 करोड़ रुपये अतिरिक्त राशि वसूल की जाए।

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